logo

About Us

जीवनदायिनी जीविका गौसेवा सदन भारत की दुकान-आपकी अपनी दुकान । । स्वदेशी से स्वावलम्बी आत्मनिर्भर भारत बनाना है_।_____तो_____। स्वदेशी खाओ, स्वदेशी बनाओ, देश बचाओ ।

“जीवनदायिनी जीविका गौसेवा सदन "गौमाता" की सेवा करने का वो निवास स्थान जहाँ पर आप को जीवन देने के लिए जीवन देने वाले सभी साधन आप के लिए उपलब्ध है”

About Us
Contact Info
P-66 Vani Vihar Road Vijay Vihar Uttam Nagar New Delhi 110059
+91 - 971 729 8110
info@jeevandayinijeevikagausewasadan.in
logo
Contact Info
P-66 Vani Vihar Road Vijay Vihar Uttam Nagar New Delhi 110059
+91 - 971 729 8110
info@jeevandayinijeevikagausewasadan.in
bg-shape pata onion frame circle leaf garlic roll roll roll tomato tomato tomato tomato
AMRIT DHARA-10ml

AMRIT DHARA

59 99.00
Weight:
Details:

[ अमृतधारा ]
           अमृतधारा : सौ रोगों पर भारी एक दवा इस का होना आपके घर में आवश्यक ही नहीं अनिवार्य है

      क्या आप जानते हैं अमृतधारा दुनिया को आयुर्वेद का अनुपम उपहार है। इसका हर घर में होना बहुत ही लाभकारी है। दर्जनों रोगों में यह एक ही दवा काम आती है

खांसी – दो बूंद अमृतधारा हलके गर्म पानी में डाल कर सुबह-शाम कुछ दिन पिएं, श्वास, खांसी, दमा, क्षय रोग में फायदेमंद है।

खुजली – दस ग्राम नीम तेल में पाँच बूंद अमृतधारा मिलाएं, मालिश करें, हर खुजली में फायदा होगा।

गैस्ट्रिक – कांच के गिलास में आधा पानी भरें, एक बूंद डाल कर पिएं।

चर्म रोग – त्वचा रोग या Skin Diseases में कारगर दवा है। शरीर के जिस हिस्से में फोड़े-फुंसी हों, वहां अमृतधारा लगाएं। बिना दर्द तुरंत राहत मिलेगी।

छाती दर्द – मीठे तेल में चार बूंद अमृतधारा मिला कर छाती पर मालिश करें, छाती का दर्द ठीक होगा।

छाले – दो-तीन बूंद कुछ पानी में मिला कर कुल्ले करें, राहत मिलेगी। ध्यान रखें कि छाले फूटे हों तो इसका इस्तेमाल न करें।

जुकाम – रुमाल पर दो-तीन बूंद डाल कर सूंघें, साँस खुल कर आएगी, जुकाम ठीक होगा। चाहें तो बाजार से एक इन्हेलर खरीद लाएं, उसे पीछे से खोल लें, अंदर की रुई निकाल कर थोड़ी सी रुई भर कर चार बूंद डाल कर पीछे का ढक्कन बंद कर लें। इन्हेलर की तरह ही सूंघें, यह अधिक प्रभावी और बेहतर ईलाज है। बाजार में मिलने वाले इन्हेलर में सफेदा या नीलगिरी का तेल ( टर्पेंटाईन ऑईल ) होता है, जो फेफड़ों के लिए नुकसानदेह होता है।

दर्द – जोड़ों, मांसपेशियों, सिर दर्द में वैसलीन के साथ लगाने से दर्द कम होता है।

दस्त – अदरक के एक चम्मच रस में एक बूंद डाल कर सेवन करें, दस्त बंद होंगे। बताशे या एक चम्मच शक्कर में एक बूंद डाल कर चूसने से भी दस्त बंद होंगे।

दांत दर्द – दांत दर्द में अमृतधारा का फाहा रख कर दबाएं, राहत मिलेगी।

पिंपल्स – उतने ही हिस्से पर लगाएं जहां पिंपल्स हैं, उसके आसपास न फैलाएं।

पेट दर्द – एक कप पानी में एक बूंद अमृतधारा डाल कर पिएं। बताशे, खांड या शक्कर में एक बूंद अमृतधारा डाल कर खाएं, पेट दर्द दूर होगा।

फोड़ा – डॉक्टर फोड़े को सर्जरी करके इलाज करते हैं लेकिन फोड़े पर अमृतधारा लगाने से कुछ दिन में खुद बैठ जाएगा।

बदहजमी – एक कप पानी में एक बूंद अमृतधारा डाल कर पिएं, बदहजमी दूर होगी।

फटें होंठ, बिवाई या फटी एड़ियां – चार बूंद अमृतधारा, एक चम्मच या दस ग्राम वैसलीन में मिलाएं, फटी एड़ियों पर लगाएं। फायदा होगा। फटी चमड़ी जुड़ जाएगी।

मंदाग्नि या भूख न लगना – दोनों भोजन के बाद ठंडे पानी में एक बूंद अमृतधारा डाल कर पिएं, मंदाग्नि, अजीर्ण, बादी, बदहजमी, गैस ठीक होंगे।

यकृत वृद्धि – चार बूंद अमृतधारा को सरसों के चौगुने तेल की मात्रा में मिला कर जिगर – तिल्ली पर मालिश करें, यकृत वृद्धि दूर होगी।

लू लगना – अमृतधारा की दो बूंद ठंडे पानी में पिलाएं, जिससे लू ठीक होती है। पुदीने की ठंडक तत्काल राहत देती है। प्रभावित व्यक्ति को ठंडी जगह पर ले जाएं, ठंडे पानी से नहलाएं, या ठंडी गीली चादरों से ढकें।

वात या गैस – कांच के गिलास में आधा पानी भरें, एक बूंद डाल कर पिएं।

सर्दी, जुकाम, टॉन्सिल – चीनी में एक बूंद डाल कर चूस लें। रूमाल में कुछ बूंदे डाल कर सूंघें।

सिर दर्द – अमृतधारा की दो बूंद ललाट और कान के आसपास हल्के हाथ से लगाएं, फायदा होगा। मालिश नहीं करें। ध्यान रखें कि अमृतधारा आंखों से दूर रखें।

सूजन – ठंड से हाथ-पैर की उंगलियों में सूजन हो, या शरीर के किसी हिस्से में सूजन हो ( आंखों छोड़ कर ) तो उस हिस्से पर अमृतधारा लगा कर सो जाएं। सुबह तक राहत मिल जाएगी।

हिचकी – अमृतधारा की एक बूंद जीभ पर रख कर, मुँह बंद कर लें, उसे सूंघें, दो मिनट में फायदा होगा।

हृदय रोग – आँवले के मुरब्बे में चार बूंद अमृतधारा डाल कर खाएं, दिल के रोग में राहत मिलेगी।

हैजा – प्याज के एक चम्मच रस में दो बूंद अमृतधारा डाल कर पीने से फायदा होगा।

पसीना बहना – शरीर से अधिक पसीना निकलने पर अमृतधारा  की चार बूंदे, एक पिसी इलायची को आधा गिलास पानी में डाल कर लें। लाभ होगा।

जोड़ों का दर्द – एक कटोरी तिल के तेल में पांच-छः बूंद अमृतधारा मिलाएं। यह तेल जोड़ों के दर्द व सूजन वाली जगह लगाएं, आराम मिलेगा।

मच्छर से बचाव – नारियल के तेल में अमृतधारा की चंद बूंदे मिला कर त्वचा पर लगाएं, मच्छर नहीं काटेंगे।


सावधानियां
बच्चों के पहुंच से दूर रखें। आंख-नाक के सीधे संपर्क से जलन व सूजन हो सकती है।

नवजात शिशु व एक साल से छोटे बच्चों को न दें।

सर्जरी के तुरंत पहले या बाद चिकित्सक परामर्श के बिना न लें।

आंख, नाक, कान में न डालें।

दवा दो साल से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को देने से पहले वैद्य से सलाह लें।

अधिकता या इस्तेमाल में लापरवाही से नुकसान संभव है।

चर्म रोगों (Skin Diseases) के लिए अच्छी दवा है, लेकिन आंख बंद कर हर तरह के चर्म रोग पर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

न्यूरोलॉजिकल सिस्टम को अमृतधारा में यूकलिप्टस अर्क होने पर नुकसान हो सकता है।

अधिक मात्रा या सेवन से पेटदर्द, चक्कर, मांसपेशियों की कमजोरी, सांस लेने में असहजता, अनिद्रा, भ्रम जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

अमृतधारा में लौंग तेल हो तो सामान्य सर्दी-खांसी के सूंघने पर कभी-कभी सांस लेने में दिक्कत होती है। नाक-गले में जलन, उल्टी, दस्त हो सकते हैं। यह फेफड़ों के संक्रमण का कारण भी बन सकता है।

अमृतधारा बहुत तेज है इसलिए इस्तेमाल के पहले थोड़ी सी जगह पर थोड़ा सा इस्तेमाल करके देखें, यदि सही असर है, तो ही बाकी जगहों पर लगाएं।

किसी जानकार – अनुभवी वैद्य या डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

जलने के घाव पर अमृतधारा न लगाएं।

कटे पर अमृतधारा न लगाएं।

गलन से हाथ-पैर खराब हों, तो अमृतधारा न लगाएं।

सर्दी या एलर्जी के जुकाम में जल्दी राहत के लिए सीधे नाक पर न लगाएं। काफी जलन होगी।

आंख में किसी भी हालत में अमृतधारा न लगने दें।

अमृतधारा के नुकसान (दुष्प्रभाव)

अधिक मात्रा में लेने पर दस्त लग सकते हैं।

इसके उपयोग से कुछ लोगों को चक्कर आ सकते हैं।

अभिनव प्रयोग :
होमियोपैथी वाली शक्कर की गोलियां 50 ग्राम लाएं। छोटी शीशियों में गोलियां भरें। उनमें 10 से 12 बूंद अमृतधारा डालें। जब बाहर जाएं, साथ रखें, बहुत काम आएंगीं। उल्टी, पेटदर्द, जी मिचलाने, गैस, खट्टी डकारें आने पर चार गोली चूसें, लाभ होगा। सादे पानी में चार गोली घोल कर पिएं, फायदा होगा।